क्या आपने कभी सोचा है कि जिस लड़के को स्कूल में ‘मुसीबतउल्लाह’ कहकर चिढ़ाया जाता था, वह भविष्य में देश का एक प्रतिष्ठित अधिकारी बनेगा? यह कहानी बिहार के सिवान जिले के मोहिबुल्ला अंसारी की है।
ज़्यादातर लोग असफलता को अपना अंत मान लेते हैं, लेकिन मोहिबुल्ला ने उसी असफलता को अपनी सीढ़ी बना लिया। आज हम बात करेंगे कि कैसे एक पिता की कही गई कड़वी बात ने उनकी पूरी दुनिया ही बदल दी।
- असफलता को अपनी सबसे बड़ी ताकत में कैसे बदलें।
- IIT और UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए मानसिक तैयारी।
- जीवन बदलने के लिए आत्म-अनुशासन की भूमिका।
- अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखने के तरीके।
- सफलता के लिए सही नजरिया और निरंतरता का महत्व।
शुरुआती दौर: जब पढ़ाई से दूर भागते थे
बचपन में मोहिबुल्ला का मन किताबों से ज्यादा शरारतों में लगता था। उनके सहपाठी उन्हें ‘मुसीबतउल्लाह’ बुलाते थे क्योंकि वह अक्सर किसी न किसी परेशानी में घिरे रहते थे।
पढ़ाई में उनका हाल इतना बुरा था कि वे प्री-बोर्ड परीक्षाओं में फेल हो गए थे। उस वक्त किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह लड़का कभी किसी बड़ी परीक्षा में भी टिक पाएगा।
पिता की वह बात जिसने सब बदल दिया
प्री-बोर्ड में फेल होने के बाद जब वे घर लौटे, तो उनके पिता ने कुछ ऐसा कहा जो सीधे उनके दिल पर लगा। उन्होंने मोहिबुल्ला की मौजूदा स्थिति और उनके धुंधले भविष्य पर कड़े सवाल उठाए।
“असफलता केवल एक घटना है, यह आपकी अंतिम पहचान नहीं है।”
IIT की राह और UPSC की तैयारी
पिता की बातों ने मोहिबुल्ला को झकझोर कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने उसी दिन खुद से वादा किया कि वे अपनी छवि को पूरी तरह बदल देंगे।
अपनी पूरी ऊर्जा उन्होंने पढ़ाई में लगा दी। सही रणनीति और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपनी बोर्ड परीक्षाओं में सुधार किया, बल्कि IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में भी अपनी जगह पक्की की।
लक्ष्य निर्धारण: UPSC की चुनौती
IIT से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद भी वे रुके नहीं। उन्होंने सिविल सेवा यानी UPSC की ओर रुख करने का फैसला लिया। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनकी नींव अब मजबूत हो चुकी थी।
| चरण | चुनौती | परिणाम |
|---|---|---|
| स्कूल | प्री-बोर्ड में असफलता | आत्ममंथन शुरू किया |
| कॉलेज | IIT प्रवेश | सफलता प्राप्त की |
| करियर | UPSC सिविल सेवा | अधिकारी बने |
सफलता के लिए जरूरी अनुशासन
मोहिबुल्ला की कहानी सिखाती है कि अनुशासन ही सब कुछ है। उन्होंने अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे बदलाव किए जो उन्हें उनके लक्ष्य तक ले आए:
- समय प्रबंधन: हर विषय के लिए एक तय समय रखा।
- निरंतरता: बिना रुके रोजाना पढ़ाई जारी रखी।
- सकारात्मकता: लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपने लक्ष्य पर टिके रहे।
Frequently Asked Questions
क्या प्री-बोर्ड में फेल होना सिविल सेवा में बाधा बनता है?
बिल्कुल नहीं। यूपीएससी के लिए आपकी ग्रेजुएशन की डिग्री और आपकी वर्तमान मेहनत मायने रखती है, स्कूल के पुराने नंबर नहीं।
आईआईटी के बाद यूपीएससी की तैयारी क्यों की?
इंजीनियरिंग के बाद प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की मदद करने और देश के नीति निर्माण में योगदान देने का सपना उन्हें लगातार प्रेरित करता था।
क्या कोचिंग के बिना यूपीएससी क्रैक किया जा सकता है?
हां, सही मार्गदर्शन, एनसीईआरटी की किताबों और इंटरनेट के संसाधनों का उपयोग करके आप खुद से भी सफलता हासिल कर सकते हैं।
मोहिबुल्ला अंसारी की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य क्या था?
उनका सबसे बड़ा रहस्य ‘आत्मविश्वास’ और अपने पिता की सीख को मानकर खुद को बदलने का पक्का इरादा था।
असफलता के डर को कैसे दूर करें?
असफलता को एक अनुभव की तरह देखें। यह समझें कि हर गलत कदम आपको सही दिशा की ओर एक नया सबक सिखाने के लिए आता है।
निष्कर्ष: आपकी सफलता आपके हाथ में है
मोहिबुल्ला अंसारी का सफर इस बात का सबूत है कि इंसान अपनी मेहनत से अपनी किस्मत खुद लिख सकता है। अगर आप आज कहीं पीछे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कल आगे नहीं बढ़ सकते।
बस अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें और कभी भी खुद को कमतर न आंकें। आपकी मेहनत ही आपको भीड़ से अलग एक नई पहचान दिलाएगी।
Source: livehindustan.com
